ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ से 15 जिलों में करीब 49 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं । इनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं।
गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा जैसी नदियां कई स्थानों पर अब भी खतरे के निशान के ऊपर हैं। जलस्तर तेजी से घटने के दौरान कटाव और तटबंधों पर दबाव बढ़ने की आशंका को देखते हुए अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
राहत अभियान भी जारी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 1251 सामुदायिक रसोई, राहत शिविर और बड़ी संख्या में नावें संचालित की जा रही हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी राहत एवं बचाव कार्य में तैनात हैं। सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने का काम भी चल रहा है।
नाव एम्बुलेंस का हो रहा उपयोग
गंगा, कोसी, बरंदी और करी कोसी नदियों में जलस्तर बढ़ने के कारण, कटिहार जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए नाव एम्बुलेंस का उपयोग शुरू कर दिया है। डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी नाव से लोगों तक पहुंच कर उनकी जांच कर रहे हैं और दवा पहुंचा रहे हैं । स्वास्थ्य संबंधी ज्यादातर शिकायतें फंगल संक्रमण, बुखार और खांसी की आ रही है । बाढ़ प्रभावित कई इलाकों में पशुओं के लिए भी चिकित्सा सेवा मुहैया कराई जा रही है ।
बिहार में कई नदियों का जलस्तर नीचे जा रहा है, यह राहत की बात है लेकिन जब तक सभी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे नहीं आता और प्रभावित गांवों से पानी पूरी तरह नहीं निकलता, तब तक संकट बना रहेगा ।