BRICS देशों के लिए बनेगा Open-Source AI नेटवर्क

शी जिनपिंग के प्रस्ताव में AI के विकास और इस्तेमाल को लेकर BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। इसके तहत बड़े AI और Large Language Models के विकास, AI ट्रेनिंग और साझा डिजिटल क्लाउड प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में सहयोग का प्रस्ताव है।

चीन का कहना है कि Open-Source AI के जरिए BRICS देशों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ाया जा सकता है और AI के क्षेत्र में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की भागीदारी मजबूत की जा सकती है। प्रस्ताव में AI के लिए एक खुला और सहयोगी इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में काम करने की बात कही गई है।

भारत के लिए क्यों अहम है चीन का AI प्लान?

चीन की यह पहल भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत एक तरफ अपनी AI क्षमता और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से विकसित कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ चीन के साथ तकनीक और रणनीतिक क्षेत्र में सहयोग को लेकर कई संवेदनशील मुद्दे भी हैं।

ऐसे में भारत के सामने चुनौती केवल BRICS के AI नेटवर्क में शामिल होने की नहीं, बल्कि यह तय करने की भी है कि साझा AI प्लेटफॉर्म से भारत को कितना तकनीकी लाभ मिल सकता है और अपनी AI आत्मनिर्भरता को कैसे मजबूत रखा जाए।

विशेषज्ञों के मुताबिक, BRICS का साझा AI इकोसिस्टम भारत को बड़े AI मॉडल, कंप्यूटिंग क्षमता, रिसर्च और AI टैलेंट के क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर दे सकता है। हालांकि चीन की तकनीकी भूमिका बढ़ने के साथ डेटा, साइबर सुरक्षा, मानकों और रणनीतिक निर्भरता जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

भारत भी बढ़ा रहा है अपनी AI क्षमता

भारत में भी भारतीय भाषाओं पर आधारित AI को लेकर तेजी से काम हो रहा है। IIT मद्रास से incubated Bodhan AI ने AI4Bharat के साथ मिलकर चार AI मॉडल लॉन्च किए हैं। ये मॉडल Speech Recognition, Text-to-Speech, Machine Translation और Optical Character Recognition यानी OCR जैसे काम कर सकते हैं।

इनमें से Translation मॉडल 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी के बीच अनुवाद की सुविधा देता है। Speech और OCR से जुड़े मॉडल भी भारतीय भाषाओं में AI के इस्तेमाल को बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। इन्हें डिजिटल पब्लिक गुड्स के तौर पर उपलब्ध कराने की दिशा में पेश किया गया है।

भारतीय भाषाओं के लिए AI में बड़ा मौका

भारत जैसे बहुभाषी देश में यह क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है। अभी AI की दुनिया में ज्यादातर बड़े मॉडल और डिजिटल टूल अंग्रेजी-केंद्रित हैं। ऐसे में भारतीय भाषाओं के लिए बेहतर Translation, Voice, Speech और OCR तकनीक शिक्षा, सरकारी सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक AI की पहुंच बढ़ा सकती है।

Bodhan AI ने इसी दिशा में कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए Student Tutor Bot और शिक्षकों के लिए Teacher Assistant Bot भी पेश किया है, जिससे भारतीय भाषाओं में AI आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

BRICS में AI को लेकर भारत के सामने क्या विकल्प?

चीन के Open-Source AI प्रस्ताव और भारत में विकसित हो रहे भारतीय भाषा मॉडल को देखते हुए BRICS में AI सहयोग भारत के लिए एक बड़ा अवसर बन सकता है। भारत अपनी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, UPI, भारतीय भाषा AI और तकनीकी प्रतिभा के अनुभव को साझा कर सकता है।

लेकिन भारत को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि BRICS का AI सहयोग केवल किसी एक देश की तकनीकी निर्भरता का माध्यम न बने। डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता, AI सुरक्षा, ओपन स्टैंडर्ड और तकनीकी आत्मनिर्भरता जैसे मुद्दों को भी इस सहयोग का हिस्सा बनाना होगा।

AI की नई दौड़ में BRICS की भूमिका

BRICS का AI प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब अमेरिका, चीन और दूसरी बड़ी टेक अर्थव्यवस्थाएं AI मॉडल, चिप्स, कंप्यूटिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।

अगर BRICS देश साझा AI रिसर्च, कंप्यूटिंग, शिक्षा, ओपन मॉडल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर वास्तविक सहयोग कर पाते हैं, तो यह समूह Global South के लिए AI का एक वैकल्पिक तकनीकी इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। वहीं भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वह इस सहयोग का हिस्सा बनते हुए अपनी AI आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वतंत्रता दोनों को बनाए रखे।