ब्रिक्स की शुरुआत आर्थिक सहयोग के मंच के रूप में हुई थी। आज इसमें 11 देश शामिल हैं और यह दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करता है। हालांकि, सदस्य देशों के राजनीतिक और रणनीतिक हित कई मुद्दों पर अलग-अलग हैं।
विकास को बनाया जा सकता है साझा आधार
भारत के लिए सबसे बड़ा अवसर यह है कि ब्रिक्स को केवल पश्चिमी देशों के विरोध या भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का मंच बनाने के बजाय विकास और व्यावहारिक सहयोग का मंच बनाया जाए।
खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, मजबूत आपूर्ति शृंखला, जलवायु परिवर्तन और MSME जैसे मुद्दों पर सदस्य देश साथ मिलकर काम कर सकते हैं।
भारत के पास UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अपने अनुभव को दूसरे ब्रिक्स देशों के साथ साझा करने का भी अवसर है।
भारत के सामने बड़ी परीक्षा
ब्रिक्स की सफलता केवल बड़ी घोषणाओं से नहीं, बल्कि उन फैसलों के जमीन पर लागू होने से तय होगी। भारत अगर सदस्य देशों के मतभेदों के बावजूद साझा हितों वाले मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने में सफल रहता है, तो ब्रिक्स को एक नया और अधिक व्यावहारिक उद्देश्य मिल सकता है।