बाबा रामदेव और बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद खत्म होने की खबर इन दिनों सियासी हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर चार साल पुरानी तल्खी एक झटके में कैसे खत्म हो गई? क्या यह महज दो लोगों के बीच गलतफहमियां दूर होने का एक सामान्य सा मामला है या फिर इसके पीछे 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव का सियासी कनेक्शन भी है?
दिलचस्प बात यह है कि दोनों के बीच सुलह ऐसे वक्त हुई है, जब उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी मिशन-2027 की तैयारियों में जुटी है। ऐसे में इस सुलह की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक अटकलों का दौर शुरू होना स्वाभाविक है।

चार साल पुराने विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

बाबा रामदेव और बृजभूषण शरण सिेह के बीच विवाद की शुरुआत 2022 में हुई थी । बृजभूषण ने उस समय पतंजलि के घी और दूसरे उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी का सिलसिला चलता रहा।
सितंबर 2026 में मामला उस वक्त और गंभीर हो गया, जब पतंजलि फूड्स ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ 50 करोड़ रुपये का मानहानि दावा दायर कर दिया । इसके बाद भी बृजभूषण की ओर से पतंजलि और रामदेव को लेकर तीखे बयान सामने आते रहे। यानी मामला सिर्फ सार्वजनिक बयानबाजी तक सीमित नहीं था, बल्कि कानूनी लड़ाई तक पहुंच चुका था।

फिर अचानक कैसे बदली तस्वीर?

23 सितंबर को दिल्ली में बाबा रामदेव और बृजभूषण शरण सिंह की मुलाकात हुई। इस बातचीत में अयोध्या के महंत राजकुमार दास और चित्रकूट के महंत आलोक दास की मध्यस्थता की बात सामने आई।
मुलाकात के बाद खुद बाबा रामदेव ने विवाद खत्म होने की बात कही। योगगुरु रामदेव के मुताबिक, सुनी-सुनाई बातों और कुछ वीडियो की वजह से बृजभूषण के मन में गलतफहमियां पैदा हो गई थीं जो बातचीत के बाद दूर हो गईं। बाबा रामदेव ने कहा कि अब दोनों के बीच कोई विवाद नहीं है और वह भी इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते।
यही नहीं, रामदेव ने बृजभूषण के खिलाफ दायर 50 करोड़ रुपये के मानहानि केस को वापस लेने की बात भी कही ।

जो विवाद चार साल में नहीं सुलझा, अब क्यों? 

उत्तर प्रदेश में अगले साल 2027 का विधानसभा चुनाव होना है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी की 80 सीटों में 33 सीटें मिली थीं, जबकि समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीती थीं। इसके बाद बीजेपी लगातार संगठन और अपने सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
ऐसे में क्या बृजभूषण शरण सिंह जैसे यूपी के चर्चित राजनीतिक चेहरे और बाबा रामदेव जैसे बड़े सामाजिक प्रभाव वाले व्यक्ति के बीच लंबे समय तक चलने वाला सार्वजनिक विवाद बीजेपी के लिए असहज पैदा कर सकता था ? 

हालांकि अभी तक ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे यह कहा जा सके कि सुलह के पीछे बीजेपी की कोई भूमिका है । उपलब्ध जानकारी के अनुसार मध्यस्थता की पहल संतों की ओर से बताई गई है। महंत राजकुमार दास और आलोक दास की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई और गलतफहमियां दूर करने की कोशिश की गई।
फिर भी जिस तरह से चार साल पुराना विवाद, सितंबर में 50 करोड़ का मानहानि दावा, उसके बाद तीखी बयानबाजी और फिर चुनाव से कुछ महीने पहले अचानक सुलह हुई है उससे अटकलों का बाजार तो गरम हो ही गया है । जितनी चर्चा सुलह की है उतनी ही चर्चा इसकी टाइमिंग को लेकर भी हो रही है ।