लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। मंगलवार, 29 सितंबर को चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई। इन 11 सीटों में 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। 23 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।

इस चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। BJP और समाजवादी पार्टी ने सभी 11 सीटों के लिए अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि को देखें तो दोनों दलों की सूची में अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।

BJP ने सभी 11 सीटों पर उम्मीदवार उतारे

BJP ने मंगलवार को छह और उम्मीदवारों के नाम घोषित किए। इससे पहले पार्टी पांच उम्मीदवारों के नाम जारी कर चुकी थी। इस तरह पार्टी ने सभी 11 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा पूरी कर दी।

BJP ने वाराणसी स्नातक सीट से केदारनाथ सिंह, मेरठ स्नातक से दिनेश गोयल और इलाहाबाद-झांसी स्नातक से अशोक कुमार राठौर को उम्मीदवार बनाया है। वहीं शिक्षक सीटों पर वाराणसी से प्रमोद मिश्रा, आगरा से हरिकिशोर तिवारी और गोरखपुर-फैजाबाद से ध्रुव त्रिपाठी को टिकट दिया गया है।

इससे पहले पार्टी ने लखनऊ स्नातक से अवनीश कुमार सिंह, आगरा स्नातक से डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट से डॉ. हरि सिंह ढिल्लों, लखनऊ शिक्षक से उमेश द्विवेदी और मेरठ शिक्षक से श्रीचंद शर्मा को उम्मीदवार बनाया था।

BJP की सूची में सवर्ण चेहरों की संख्या ज्यादा

BJP के 11 उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि की बात करें तो आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें 5 ब्राह्मण, 3 ठाकुर, 1 कुर्मी, 1 वैश्य और 1 पंजाबी समुदाय से जुड़े उम्मीदवार हैं।

इस सूची में ब्राह्मण और ठाकुर समुदाय से जुड़े उम्मीदवारों की संख्या अधिक है। इसी वजह से BJP के उम्मीदवार चयन को उसके सामाजिक समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, केवल उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर पार्टी की पूरी चुनावी रणनीति तय होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

सपा ने भी सभी 11 सीटों पर उम्मीदवार उतारे

समाजवादी पार्टी ने इससे पहले ही सभी 11 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मिर्जापुर-वाराणसी से लाल बिहारी यादव, लखनऊ से सुशील कुमार, आगरा से प्रकाशचंद्र गुप्ता, गोरखपुर-फैजाबाद से कमलेश यादव, मुरादाबाद-बरेली से दानिश अख्तर और मेरठ से नितिन तोमर को उम्मीदवार बनाया गया है।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में वाराणसी से आशुतोष सिन्हा, झांसी से डॉ. मान सिंह यादव, आगरा से शशांक यादव, मेरठ से परमिंदर भाटी और लखनऊ से कांति सिंह को टिकट दिया गया है।

सपा की सूची में कौन-कौन से सामाजिक वर्ग?

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, सपा के 11 उम्मीदवारों में 4 यादव, 2 कुर्मी, 1 गुर्जर, 1 मुस्लिम, 1 कायस्थ, 1 वैश्य और 1 क्षत्रिय समुदाय से जुड़े उम्मीदवार हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें 7 उम्मीदवार OBC वर्ग से जुड़े हैं।

सपा की राजनीति में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक का सामाजिक समीकरण महत्वपूर्ण रहा है। उम्मीदवारों की सूची को भी इसी सामाजिक समीकरण के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, इस बार सपा की 11 उम्मीदवारों की सूची में दलित समुदाय से कोई उम्मीदवार नहीं है।

11 सीटों पर ही क्यों है इतना ध्यान?

विधान परिषद की इन 11 सीटों पर चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग है। इनमें 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र हैं। इन सीटों पर संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के पंजीकृत स्नातक और शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं।

चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। इसके बाद 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक महत्व

उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में विधान परिषद की इन 11 सीटों का चुनाव भी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है। BJP और सपा दोनों ने उम्मीदवारों के चयन में अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व दिया है।

BJP की सूची में ब्राह्मण और ठाकुर उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा है, जबकि सपा की सूची में यादव, कुर्मी और अन्य OBC वर्गों के उम्मीदवारों को जगह मिली है। इसी वजह से दोनों दलों के उम्मीदवार चयन को लेकर सामाजिक और राजनीतिक समीकरण पर चर्चा हो रही है।

हालांकि, यह चुनाव शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों तक सीमित है, इसलिए इसके सामाजिक समीकरण को सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव के पूरे राज्यव्यापी समीकरण के बराबर नहीं माना जा सकता। फिर भी, उम्मीदवारों के चयन को लेकर दोनों दलों के सामाजिक समीकरण पर चर्चा तेज हो गई है।