एक महीने में बदल गई तस्वीर
आकाश आनंद को 3 सितंबर को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाया गया और 10 सितंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी बाहर कर दिया गया। इसके बाद मायावती ने ईशान आनंद को संगठन में आगे बढ़ाया। 23 सितंबर को ईशान को राष्ट्रीय संयोजक बना दिया गया। लेकिन करीब 13 दिन बाद ही समीकरण फिर बदल गए और आकाश को दोबारा वही जिम्मेदारी मिल गई।
इस घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि BSP में आखिर मायावती के बाद नंबर-2 की भूमिका किसके लिए तैयार की जा रही है।
आकाश की वापसी में परिवार की कितनी भूमिका?
आकाश की वापसी को लेकर परिवार की भूमिका भी चर्चा में है। मायावती के भाई आनंद कुमार BSP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। 5 अक्टूबर को आकाश की वापसी की घोषणा करते हुए मायावती ने कहा कि आनंद कुमार और ईशान ने भी आकाश को एक और मौका देने के प्रस्ताव का समर्थन किया था। इससे यह साफ होता है कि परिवार के स्तर पर आकाश की वापसी को लेकर सहमति थी।
आकाश को फिर मौका क्यों मिला?
वापसी से पहले आकाश आनंद ने सार्वजनिक रूप से मायावती के प्रति अपना रुख साफ किया। उन्होंने BSP को अपना परिवार और मायावती को अपनी बुआ मां और राजनीतिक गुरु बताया। साथ ही उन्होंने अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के खिलाफ मायावती की कार्रवाई का समर्थन किया और कहा कि पार्टी और आंदोलन का हित व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर है।
मायावती ने भी कहा कि अशोक सिद्धार्थ के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद आकाश के व्यवहार और काम करने के तरीके में बदलाव दिखाई दिया। पार्टी नेताओं की राय के बाद उन्हें दोबारा जिम्मेदारी देने का फैसला किया गया।
यानी इस वापसी को सिर्फ पारिवारिक मेल-मिलाप के तौर पर देखना सही नहीं होगा । इसमें संगठन, और 2027 से पहले नेतृत्व को लेकर चल रही तैयारियों का पहलू भी जुड़ा हुआ है।
आकाश कब-कब बाहर हुए और क्यों?
आकाश आनंद का BSP में बाहर-भीतर होने का सिलसिला 2024 से जारी है। मई 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान उनके आक्रामक चुनावी भाषण और राजनीतिक अपरिपक्वता का हवाला देकर मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक और उत्तराधिकारी की जिम्मेदारी से हटा दिया था, लेकिन जून में उनकी वापसी हो गई। मार्च 2025 में उन्हें फिर पार्टी से बाहर किया गया। तब मायावती ने आकाश पर उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में काम करने और पार्टी हितों से समझौते की बात कही थी । हालांकि माफी के बाद अप्रैल में आकाश की वापसी हुई। सितंबर 2026 में एक बार फिर उन्हें पहले राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया गया और फिर पार्टी से बाहर कर दिया गया। इस बार भी अशोक सिद्धार्थ का मुद्दा सामने आया। बाद में आकाश की माफी और अशोक सिद्धार्थ के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद 5 अक्टूबर को उनकी फिर वापसी हुई।
आकाश या ईशान, मायावती के बाद कौन?
फिलहाल पद के लिहाज से आकाश आनंद आगे हैं, क्योंकि राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी फिर से उनके पास है। लेकिन उत्तराधिकारी के सवाल का अंतिम जवाब अभी सामने नहीं आया है।
आकाश को मायावती पहले अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर चुकी हैं। वहीं सितंबर में ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाया जाना बताता है कि मायावती ने परिवार की अगली पीढ़ी में दूसरे चेहरे को भी आगे बढ़ाने का विकल्प खुला रखा है।
यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ आकाश की वापसी का नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या यह वापसी आकाश को एक बार फिर मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित करने की दिशा में कदम है, या आने वाले समय में आकाश और ईशान दोनों की भूमिका पार्टी में बढ़ेगी ।
2027 से पहले क्या होगा अगला कदम?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले BSP के लिए संगठन को मजबूत करना पहली प्राथमिकता है । जहां तक नेतृत्व का सवाल है तो आने वाले दिनों में आकाश और ईशान को मिलने वाली जिम्मेदारियों और संगठन में उनकी सक्रियता पर लोगों की नजरें रहेंगी । इन फैसलों से यह समझने में मदद मिल सकती है कि मायावती अपने उत्तराधिकार को लेकर क्या सोच रखती हैं ।
फिलहाल इतना जरूर है कि आकाश की वापसी ने उत्तराधिकारी की बहस को खत्म नहीं किया, बल्कि उसे और बड़ा कर दिया है।



