29 सितंबर को JDU प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और मंत्री श्रवण कुमार ने नीतीश कुमार से मुलाकात की। बैठक के बाद श्रवण कुमार ने कहा कि मामला पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के संज्ञान में है और उचित समय पर इसका समाधान किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार को पूरे मामले की जानकारी है।
जन सुराज के उम्मीदवार के समर्थन में अनंत
विवाद पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की MLC सीट को लेकर है। JDU ने इस सीट से मौजूदा MLC और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार को दोबारा उम्मीदवार बनाया है।
लेकिन मोकामा से JDU विधायक अनंत सिंह नीरज कुमार के विरोध में खड़े हो गए हैं । इतना ही नहीं अनंत सिंह ने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह को समर्थन देने का खुला ऐलान कर दिया है।
यानी स्थिति कुछ ऐसी है कि JDU का आधिकारिक उम्मीदवार एक तरफ है और उसी पार्टी का विधायक दूसरे उम्मीदवार के समर्थन में खड़ा है और कह रहा है कि पार्टी के उम्मीदवार को जीतने नहीं दूंगा ।
पहले सुलह की कोशिश हो चुकी है
पार्टी नेतृत्व ने सितंबर की शुरुआत में दोनों नेताओं को साथ बैठाकर मामला शांत कराने की कोशिश भी की थी। उस वक्त लगा था कि विवाद खत्म हो सकता है, लेकिन बात बनी नहीं ।
इसके बावजूद JDU ने नीरज कुमार की उम्मीदवारी वापस नहीं ली और उन्हें पटना स्नातक सीट से अपना उम्मीदवार बनाए रखा। तो फिर नीतीश क्यों सक्रिय हुए? यही इस समय सबसे बड़ा सवाल है।
हालांकि नीतीश कुमार ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप किया है अभी ऐसा नहीं कह सकते । न ही पार्टी की तरफ से इस तरह की बात कही गई है ।
लेकिन इतना तो स्पष्ट है कि पार्टी का उम्मीदवार चुनाव मैदान में है और उसी पार्टी का एक प्रभावशाली विधायक उसके खिलाफ दूसरे उम्मीदवार का समर्थन कर रहा है। अगर यह टकराव चुनाव तक जारी रहता है, तो इससे पार्टी को नुकसान हो सकता है ।
माना जा रहा है कि इसी वजह से पार्टी नेतृत्व अब इस विवाद को और बढ़ने से रोकना चाहता है ।
क्या नीतीश दोनों को बैठाएंगे?
फिलहाल इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है कि नीतीश कुमार खुद अनंत सिंह और नीरज कुमार को आमने-सामने बैठाकर समझौता कराएंगे। लेकिन अब मामला नीतीश कुमार तक पहुंच चुका है। ऐसे में पार्टी के अगले कदम पर लोगों की नजरें टिकी हैं ।
फिलहाल इतना साफ है कि पटना स्नातक सीट का विवाद अब सिर्फ अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच की लड़ाई नहीं रह गया है। यह JDU के नेतृत्व के लिए भी एक चुनौती बन गया है। नीतीश कुमार की सक्रियता इसी ओर इशारा कर रही है ।
अनंत-नीरज की पुरानी अदावत की वजह क्या है?
अनंत सिंह और नीरज कुमार की सीधी राजनीतिक भिड़ंत 2015 के मोकामा विधानसभा चुनाव में हुई थी। तब JDU ने नीरज कुमार को मैदान में उतारा था, जबकि अनंत सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े और करीब 18 हजार वोटों से जीत गए। बताया जाता है कि इसके बाद दोनों के बीच राजनीतिक अदावत बढ़ गई । 2019 के AK-47 मामले ने इस रिश्ते में और कड़वाहट बढ़ा दी। अनंत सिंह ने आरोप लगाया था कि उन्हें इस मामले में फंसाने के पीछे नीरज कुमार की भूमिका थी। नीरज कुमार ने इस आरोप को खारिज कर दिया था । अगस्त 2024 में पटना हाईकोर्ट ने AK-47 मामले में अनंत सिंह को बरी कर दिया। अब नीरज कुमार को पटना स्नातक सीट से JDU का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पुराना विवाद एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है।