याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि CAA और NRC के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान कुछ नेताओं के भाषणों की भी हिंसा भड़काने में भूमिका थी ।
कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर समेत 4 BJP नेताओं पर FIR की मांग
शेख मुज्तबा फारूक की याचिका में BJP नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, प्रवेश साहिब सिंह वर्मा और अभय वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि CAA और NRC विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिए गए इन नेताओं के भाषणों ने हिंसा से पहले बने माहौल को प्रभावित किया और दंगों में उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए।
सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत कई नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग
एक अन्य याचिका में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के अलावा AAP नेताओं मनीष सिसोदिया और अमानतुल्लाह खान, AIMIM नेता अकबरुद्दीन ओवैसी और पूर्व विधायक वारिस पठान के खिलाफ भी FIR और जांच की मांग की गई थी। याचिकाओं में अलग-अलग नेताओं के कथित बयानों को लेकर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।
बृंदा करात ने पुलिस और RAF की भूमिका की जांच मांगी
याचिकाओं में सिर्फ नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग नहीं थी। CPI(M) नेता बृंदा करात की ओर से दायर याचिका में पुलिस, RAF और अन्य सरकारी अधिकारियों के कथित आचरण और ड्यूटी में लापरवाही की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी। कुछ याचिकाओं में कोर्ट की निगरानी में SIT गठित करने का अनुरोध भी किया गया था।
CAA विरोधी प्रदर्शनों की कथित फंडिंग की NIA जांच का अनुरोध
याचिकाओं के एक हिस्से में सीएए विरोधी प्रदर्शनों की कथित फंडिंग और उससे जुड़े लोगों की जांच NIA से कराने की मांग भी की गई थी। इसके अलावा 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया में सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाएं भी इसी सुनवाई में शामिल थीं। हाई कोर्ट ने इन मांगों से जुड़ी याचिकाओं को भी खारिज कर दिया।
फरवरी 2020 में हुई थी उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा
2020 के फरवरी महीने में सीएए और एनआरसी के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी । तब दंगों में करीब 53 मारे गए थे और करीब 700 लोग घायल हुए । कई इलाकों में बड़े पैमाने पर आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई थीं।



