दिल्ली: भारत के खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India—FSSAI) ने नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य ऐसे एनालॉग उत्पादों के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाना है, जिन्हें पनीर के नाम पर बेचा जा रहा है। FSSAI का कहना है कि इस कदम से उपभोक्ताओं को गुमराह होने से बचाया जा सकेगा।

हाल के दिनों में ‘एनालॉग पनीर’ शब्द काफी चर्चा में है। खाद्य नियामक संस्थाओं की कार्रवाई के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि गैर-डेयरी उत्पादों को ‘एनालॉग पनीर’ क्यों कहा जाता है और इन्हें सीधे ‘नकली पनीर’ क्यों नहीं कहा जाता?

क्या होता है एनालॉग प्रोडक्ट?
FSSAI के मुताबिक, एनालॉग वह उत्पाद है, जिसमें दूध से मिलने वाले किसी घटक को पूरी तरह या आंशिक रूप से दूसरे खाद्य घटकों से बदला जाता है। आसान भाषा में समझें तो ‘एनालॉग पनीर’ ऐसा उत्पाद है, जो देखने, स्वाद या इस्तेमाल में पनीर जैसा हो सकता है, लेकिन इसे बनाने में दूध के सामान्य घटकों की जगह अन्य खाद्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें वनस्पति वसा या अन्य गैर-डेयरी सामग्री शामिल हो सकती हैं।

फिर ‘नकली पनीर’ क्या है?
‘नकली पनीर’ शब्द आम तौर पर ऐसे उत्पाद के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसे पनीर बताकर बेचा जाए, लेकिन वह पनीर के निर्धारित मानकों या आवश्यक संरचना को पूरा न करता हो। यानी हर एनालॉग पनीर को जरूरी नहीं कि ‘नकली’ कहा जाए।

मुख्य अंतर यह है कि एनालॉग एक नियामकीय श्रेणी है, जबकि ‘नकली पनीर’ आम बोलचाल में ऐसे उत्पाद के लिए कहा जाता है, जिसे गलत तरीके से असली पनीर के रूप में पेश किया जा रहा हो।

किन उत्पादों को एनालॉग माना जाएगा?
FSSAI के नियमों के तहत जो दूध उत्पाद और मिश्रित दूध उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुसार बनाए जाते हैं, उनमें अगर दूध के प्रमुख घटकों, जैसे दूध की चर्बी या दूध प्रोटीन, को गैर-डेयरी सामग्री से बदल दिया जाता है, तो ऐसे उत्पादों को ‘एनालॉग’ की श्रेणी में रखा जाएगा।

इन गैर-डेयरी सामग्रियों में वनस्पति तेल, वनस्पति वसा या वनस्पति प्रोटीन जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं। हालांकि, तैयार उत्पाद देखने या इस्तेमाल में मूल दूध उत्पाद जैसा हो सकता है।

इसे ‘पनीर’ क्यों नहीं कहा जा सकता?
FSSAI के नियमों के मुताबिक, एनालॉग उत्पादों को डेयरी उत्पाद नहीं माना जाता। इसलिए ऐसे उत्पाद डेयरी से जुड़े नामों और शब्दों के इस्तेमाल के लिए तय मानकों को पूरा नहीं करते। यही वजह है कि एनालॉग उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और मार्केटिंग में ‘पनीर’ जैसे डेयरी शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

FSSAI ने क्या प्रस्ताव दिया है?
FSSAI ने देशभर में गैर-डेयरी एनालॉग उत्पादों को ‘पनीर’ के नाम से बनाने और बेचने पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है।

FSSAI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य ऐसे एनालॉग उत्पादों को ‘पनीर’ के रूप में बनाने और बेचने पर रोक लगाना है, ताकि उपभोक्ताओं को उत्पाद की प्रकृति और उसकी वास्तविक संरचना को लेकर भ्रमित होने से बचाया जा सके।

प्रस्ताव के मुताबिक, जो उत्पाद पहले से ‘डेयरी संदर्भ में एनालॉग’ श्रेणी के तहत पंजीकृत या लाइसेंस प्राप्त हैं, उन्हें भी अपने नाम, लेबलिंग और मार्केटिंग में ‘पनीर’ शब्द का इस्तेमाल बंद करना होगा।

कई राज्यों में पहले ही लग चुकी है रोक
एनालॉग ‘पनीर’ को लेकर कई राज्यों में पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है। मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड समेत कई राज्यों ने खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के चलते ऐसे उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई है।

ज़ोमैटो ने भी अपनाई सख्त नीति
पिछले महीने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ज़ोमैटो ने भी एनालॉग ‘पनीर’ से तैयार व्यंजनों को लेकर जीरो-टॉलरेंस नीति लागू करने की घोषणा की थी।

कंपनी ने चेतावनी दी थी कि नियमों का पालन नहीं करने वाले रेस्तरां को प्लेटफॉर्म से हटाया जा सकता है।

नई नीति के तहत रेस्तरां को सुधारात्मक कदम उठाने के लिए कहा गया है। इनमें एनालॉग डेयरी उत्पादों की जगह वास्तविक डेयरी उत्पादों का इस्तेमाल करना शामिल है। अगर किसी डिश में तुरंत बदलाव करना संभव नहीं है, तो ऐसे व्यंजनों को मेन्यू से हटाने के लिए कहा गया है।