नोएडा: पेरिस की पहचान माने जाने वाले एफिल टॉवर से जुड़ा एक विवाद अब बड़े प्रशासनिक फैसले तक पहुंच गया है। महिला कर्मचारियों की तैनाती को लेकर उठे विवाद के बाद एफिल टॉवर के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाली संस्था Société d’Exploitation de la Tour Eiffel (SETE) के प्रमुख पैट्रिक ब्रैंको रुइवो ने इस साल के अंत में अपना पद छोड़ने का फैसला किया है।
यह मामला सितंबर की शुरुआत में उस समय चर्चा में आया जब BAPS (Bochasanwasi Akshar Purushottam Swaminarayan Sanstha) के एक प्रतिनिधिमंडल के एफिल टॉवर दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों की ड्यूटी को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
क्या है पूरा विवाद?
मिली जानकारी के अनुसार मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक BAPS प्रतिनिधिमंडल की ओर से दौरे के दौरान महिलाओं के साथ सीधे संपर्क को कम करने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद कुछ स्थानों पर महिला कर्मचारियों की जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किया गया। मामला सामने आने के बाद एफिल टॉवर के कर्मचारियों और यूनियन ने इसका विरोध किया। कर्मचारियों की ओर से सवाल उठाया गया कि क्या किसी कर्मचारी को केवल उसके जेंडर के आधार पर किसी खास कार्यस्थल या जिम्मेदारी से हटाया जा सकता है।विरोध बढ़ने के बाद कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान एफिल टॉवर का संचालन कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ और टॉवर को अस्थायी रूप से बंद भी करना पड़ा। बाद में बातचीत के बाद इसे दोबारा खोल दिया गया।
जांच के बाद सामने आईं खामियां
विवाद बढ़ने के बाद SETE ने मामले की स्वतंत्र जांच कराई। रिपोर्टों के अनुसार जांच में एफिल टॉवर के संचालन और निर्णय लेने की प्रक्रिया में कुछ कमियां सामने आईं। SETE ने बाद में स्वीकार किया कि महिला कर्मचारियों की तैनाती में इस तरह का बदलाव नहीं किया जाना चाहिए था। संस्था के अनुसार प्रतिनिधिमंडल की मांग को स्वीकार करने के बजाय कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार के सिद्धांत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी।जांच के बाद SETE प्रमुख पैट्रिक ब्रैंको रुइवो के साल के अंत में पद छोड़ने की जानकारी सामने आई।
विवाद पर पेरिस के अधिकारियों की प्रतिक्रिया
इस मामले ने फ्रांस में भी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा पैदा की। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्मचारियों के विरोध का समर्थन किया और जेंडर के आधार पर कर्मचारियों की ड्यूटी तय किए जाने पर सवाल उठाए।
इस विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया कि धार्मिक या सांस्कृतिक अनुरोधों और कार्यस्थल पर समान व्यवहार के सिद्धांत के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
BAPS प्रतिनिधिमंडल पेरिस क्यों पहुंचा था?
यह विवाद उस समय सामने आया जब BAPS का प्रतिनिधिमंडल पेरिस में BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचा था। रिपोर्टों के अनुसार प्रतिनिधिमंडल में करीब 100 लोग शामिल थे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कार्यक्रम से जुड़े थे। उन्होंने भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक संबंधों और दोनों देशों के बीच साझा विरासत पर बात की।
हालांकि मंदिर उद्घाटन के दौरान एफिल टॉवर से जुड़ा महिला स्टाफ विवाद बाद में इस पूरे दौरे का सबसे चर्चित मुद्दा बन गया।