अमेरिका में एक फैसले को लेकर इन दिनों बड़ी बहस छिड़ी हुई है। मामला अमेरिकी सेना के पूर्व मेजर निदाल मलिक हसन को पहले से सुनाई जा चुकी मौत की सजा से जुड़ा है। हसन को 2009 में टेक्सास के फोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर हुई गोलीबारी में 13 लोगों की हत्या का दोषी ठहराया गया था। सैन्य अदालत ने 2013 में उसे मौत की सजा सुनाई थी। अब अमेरिकी सेना ने इस सजा पर अमल के लिए 3 दिसंबर 2026 की तारीख तय की है।
इस मामले में विवाद सिर्फ सजा को लेकर नहीं है। पेंटागन ने मृत्युदंड की प्रक्रिया का लाइव प्रसारण करने की योजना भी घोषित की है। इसी योजना को लेकर अमेरिका में कानूनी और नैतिक बहस छिड़ गई है। सवाल यह उठ रहा है कि अमेरिका इस सजा को दुनिया के सामने लाइव क्यों दिखाना चाहता है?
अमेरिका मौत की सजा लाइव क्यों दिखाना चाहता है?
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मृत्युदंड के सार्वजनिक प्रसारण का समर्थन किया है। उनका कहना है कि लोगों को यह देखना चाहिए कि इस तरह के गंभीर अपराधों के क्या परिणाम होते हैं। उनके मुताबिक, इस सजा को सार्वजनिक करने से अपराध की गंभीरता और उसके परिणामों का संदेश दिया जा सकेगा।
दूसरी तरफ इस फैसले को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि दोषी को कानून के मुताबिक सजा देना और उसकी मौत का लाइव प्रसारण करना दो अलग बातें हैं। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या ऐसे प्रसारण से अपराध कम होंगे ? फिलहाल ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं है, जिससे यह साबित हो कि मृत्युदंड का लाइव प्रसारण अपराध रोकने में प्रभावी होगा।
1936 के बाद पहली बार क्यों हो रही चर्चा?
अमेरिका में सार्वजनिक रूप से आखिरी बार 1936 में फांसी दी गई थी। इसके बाद खुले तौर पर लोगों के सामने फांसी देने का चलन बंद हो गया, हालांकि देश में मृत्युदंड जारी रहा।
निदाल हसन के मामले में खास बात यह है कि अगर पेंटागन की योजना लागू होती है, तो यह अमेरिका में मृत्युदंड दिए जाने का पहला ज्ञात लाइव प्रसारण होगा। हसन को फांसी पर नहीं लटकाया जाएगा, बल्कि फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मौत की सजा दी जाएगी। यानी सैनिकों का एक दल उस पर गोलियां चलाएगा।
क्या है निदाल हसन का पूरा मामला?
मेजर निदाल मलिक हसन अमेरिकी सेना में मनोचिकित्सक था। 5 नवंबर 2009 को उसने टेक्सास के फोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर गोलीबारी की, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई और 32 लोग घायल हुए। अगस्त 2013 में सैन्य अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी।
अमेरिकी सेना के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अक्टूबर 2026 को हसन को पहले से सुनाई गई मौत की सजा को मंजूरी दी। इसके बाद सेना ने 3 दिसंबर 2026 को सजा पर अमल की तारीख तय की। इससे पहले, मार्च 2025 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हसन की दोषसिद्धि पर दोबारा विचार करने की याचिका खारिज कर दी थी।
न्याय या मौत का सार्वजनिक प्रदर्शन?
इस पूरे मामले में बहस अब सिर्फ मृत्युदंड तक सीमित नहीं है। एक पक्ष का तर्क है कि गंभीर अपराधों के परिणाम जनता के सामने आने चाहिए। दूसरी ओर, आलोचकों को चिंता है कि लाइव प्रसारण न्याय की प्रक्रिया को सार्वजनिक तमाशे में बदल सकता है और हिंसक सामग्री के प्रसार को बढ़ावा दे सकता है।



