गुजरात से शुरू हुआ सफर
2001 में गुजरात की कमान संभालने के बाद नरेंद्र मोदी के सामने भुज समेत कच्छ में आए विनाशकारी भूकंप के बाद पुनर्वास और राज्य को विकास की पटरी पर लाने की चुनौती थी जिसे उन्होंने बखूबी अंजाम तक पहुंचाया ।
2003 में शुरू हुआ वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट राज्य में निवेश लाने की उनकी रणनीति का अहम हिस्सा बना। इसी दौरान टाटा मोटर्स का नैनो प्रोजेक्ट साणंद पहुंचा। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए ज्योतिग्राम योजना, लड़कियों की शिक्षा के लिए कन्या केलावणी और गांवों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ने के लिए ई-ग्राम जैसी योजनाओं पर काम हुआ।
नर्मदा परियोजना, नहरों, चेक डैम और माइक्रो इरिगेशन के जरिए पानी और खेती से जुड़े मुद्दों पर भी जोर दिया गया। गुजरात में विकास का यही मॉडल आगे चलकर नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय पहचान का आधार बना।
2014 में पहुंचे प्रधानमंत्री पद तक
2013 में भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अकेले 282 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया और 26 मई को मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार ने जनधन योजना के जरिए बैंकिंग व्यवस्था को गरीब और वंचित वर्ग तक पहुंचाने पर जोर दिया। आधार और मोबाइल के साथ बैंक खातों को जोड़कर सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी मजबूत हुई। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने और बिचौलियों की भूमिका कम करने की कोशिश को गति मिली।
इसके बाद 2016 की नोटबंदी और 2017 में GST जैसे बड़े आर्थिक फैसले सामने आए। नोटबंदी का उद्देश्य सरकार ने काले धन, नकली मुद्रा और आतंकवाद की फंडिंग पर रोक बताया, जबकि GST के जरिए देश की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को एक साझा ढांचे में लाया गया। इसी दौर में डिजिटल भुगतान को भी बढ़ावा मिला और आगे चलकर UPI देश में डिजिटल लेनदेन का प्रमुख माध्यम बन गया।
सुरक्षा और बड़े राजनीतिक फैसले
मोदी सरकार के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी खास जोर रहा। उरी के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के जवाबी रुख को लेकर एक स्पष्ट संदेश दिया। इन दोनों कार्रवाइयों की गूंज अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची और भारत की सुरक्षा नीति चर्चा के केंद्र में आ गई।
इसके बाद 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधानों को खत्म करने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने का फैसला हुआ। यह मोदी सरकार के सबसे बड़े राजनीतिक फैसलों में शामिल रहा।
इसी कार्यकाल में नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA लागू किया गया। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के बाद साफ हुआ और जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा समारोह हुआ।
महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए फैसले
मोदी सरकार ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े फैसलों पर भी जोर दिया। 2023 में संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि यह आरक्षण जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होगा।
2019 में संविधान संशोधन के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था भी की गई।
25 साल बाद भी चर्चा के केंद्र में मोदी
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 303 सीटें जीतकर अपने दम पर फिर बहुमत हासिल किया। इसके बाद 2024 में भाजपा को अकेले बहुमत नहीं मिला, लेकिन NDA ने बहुमत हासिल किया और नरेंद्र मोदी ने 9 जून 2024 को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
इन 25 वर्षों में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए फैसलों ने देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था, प्रशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके समर्थक इन फैसलों को बड़े सकारात्मक बदलावों से जोड़ते हैं, जबकि विपक्ष कई नीतियों और उनके असर पर सवाल उठाता रहा है।
यही राजनीतिक बहस नरेंद्र मोदी के पिछले 25 साल के सफर को लगातार चर्चा के केंद्र में बनाए रखती है । अब अर्थव्यवस्था, रोजगार, राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीक और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य उनके नेतृत्व की अगली बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हैं।



