दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने MDR 0.4 % पर स्पष्ट करते हुए कहा है कि कुछ उच्च-मूल्य वाले यूपीआई लेनदेन पर लागू होने वाला नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) न तो कोई टैक्स है और न ही उपभोक्ताओं पर लगाया गया अतिरिक्त शुल्क। उन्होंने कहा कि MDR से मिलने वाली राशि सरकार के खाते में नहीं जाएगी।
यह स्पष्टीकरण विपक्षी नेताओं की उस आलोचना के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कुछ यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने का विरोध किया था। सीतारमण ने बताया कि MDR डिजिटल भुगतान व्यवस्था का हिस्सा है। इससे प्राप्त राशि बैंकों, पेमेंट प्लेटफॉर्म्स और लेनदेन को संसाधित करने वाली अन्य कंपनियों के बीच बांटी जाएगी।
15 अक्टूबर 2026 से पर्सन-टू-मर्चेंट UPI पेमेंट्स पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा,
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के नए फ्रेमवर्क के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र पर्सन-टू-मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा। हालांकि, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले UPI लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
MDR की रकम किसे मिलेगी?
वित्त मंत्री के मुताबिक MDR से मिलने वाली राशि को अलग-अलग पक्षों के बीच बांटा जाएगा
40 प्रतिशत ग्राहक के बैंक को मिलेगा। 30 प्रतिशत पेमेंट गेटवे को मिलेगा।, 20 प्रतिशत UPI ऐप को मिलेगा। 10 प्रतिशत उस बैंक को मिलेगा, जो संबंधित UPI ऐप को स्पॉन्सर करता है। इस तरह MDR से प्राप्त पूरी राशि भुगतान प्रक्रिया से जुड़े बैंकों, पेमेंट गेटवे और UPI प्लेटफॉर्म्स के बीच वितरित होगी।
मिली जानकारी के अनुसार सीतारमण ने कहा कि यह चार्ज डिजिटल पेमेंट के पीछे की इन्फ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करने और टेक्नोलॉजी अपडेट और इनोवेशन फंड करने के लिए है। उन्होंने यह भी कहा कि यह फीस ग्राहकों से वसूलने के लिए नहीं है। बैंकों को कहा गया है कि वे सुनिश्चित करें कि व्यापारी यह चार्ज ग्राहकों पर न डालें।
कौन सी UPI पेमेंट पर यह चार्ज लगेगा?
0.4 प्रतिशत MDR केवल निर्धारित व्यक्ति-से-व्यापारी UPI लेनदेन पर लागू होगा, जिनकी राशि ₹2,000 से अधिक है। उदाहरण के लिए, ₹10,000 के पात्र UPI भुगतान पर ₹40 का MDR लगेगा। वहीं, ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है। हालांकि छोटे व्यापारियों को इस नए MDR ढांचे से बाहर रखा गया है। ऐसे व्यापारी, जिन्हें एक महीने में UPI QR के जरिए ₹ 1 लाख तक का भुगतान प्राप्त होता है, उन पर यह MDR लागू नहीं होगा। इसके अलावा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर भी पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।
सरकार और NPCI ने कहा है कि अधिकांश रोज़मर्रा के UPI व्यापारी पेमेंट इससे प्रभावित नहीं होंगे।
मिली जानकारी के मुताबिक कुछ सेक्टर्स के लिए MDR की अलग शुल्क संरचना होगी। उदाहरण के लिए, रेलवे टिकट, ईंधन, टेलीकॉम और इंश्योरेंस जैसी सेवाओं के लिए ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर सामान्य 0.4 प्रतिशत MDR के बजाय ₹5 का फिक्स्ड MDR लागू होगा।
नया MDR क्यों लाया जा रहा है?
UPI कई वर्षों से जीरो-MDR मॉडल पर काम कर रहा है। इसी वजह से डिजिटल भुगतान को तेजी से बढ़ावा मिला और इसे आम लोगों तक आसानी से पहुंचाया जा सका। अब नए सिस्टम का उद्देश्य बैंकों, पेमेंट कंपनियों और पेमेंट नेटवर्क से जुड़ी अन्य संस्थाओं के लिए आय का एक स्रोत तैयार करना है।
NPCI का यह संशोधित ढांचा ऐसे समय में आया है, जब UPI देशभर में बड़े पैमाने पर डिजिटल भुगतान को संभाल रहा है। उद्योग विश्लेषकों के मुताबिक नई शुल्क व्यवस्था से बैंकों और फिनटेक कंपनियों के लिए अतिरिक्त राजस्व का रास्ता खुल सकता है।
नए ढांचे के तहत MDR से एक समर्पित फंड को भी समर्थन मिलेगा। इस फंड का उद्देश्य छोटे व्यापारियों के बीच UPI को बढ़ावा देना और इसके इस्तेमाल को बढ़ाना है।
व्यापारी चिंतित
सरकार का कहना है कि यह शुल्क ग्राहकों से नहीं वसूला जाना चाहिए। हालांकि कुछ व्यापारियों ने इस व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि MDR से उनके कारोबार की लागत बढ़ सकती है, खासकर उन मामलों में जहां डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर होता है।
मिली जानकारी के मुताबिक, कुछ सेक्टर्स के लिए MDR की अलग शुल्क संरचना होगी। उदाहरण के लिए, रेलवे टिकट, ईंधन, टेलीकॉम और इंश्योरेंस जैसी सेवाओं के लिए ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर सामान्य 0.4 प्रतिशत MDR के बजाय ₹5 का फिक्स्ड MDR लागू होगा।