2020 दिल्ली दंगा मामले में दोनों की जमानत याचिका खारिज, उमर खालिद की तीसरी बेल अर्जी भी मंजूर नहीं हुई

दिल्ली दंगा साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को इस बार भी जमानत नहीं मिली। दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। उमर खालिद की यह हाईकोर्ट में तीसरी नियमित जमानत याचिका थी। इससे पहले 2022 और 2025 में भी उनकी जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। वहीं, शरजील इमाम ने भी 4 जुलाई 2026 को ट्रायल कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की बेंच ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी 2026 के आदेश में तय शर्तों को बदल नहीं सकती । सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में उमर खालिद और शरजील इमाम को तत्काल नियमित जमानत देने से इनकार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को दोबारा जमानत मांगने की अनुमति दी थी। इसके लिए शर्त रखी गई थी कि पहले संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी हो । अगर 5 जनवरी 2027 तक ऐसा नहीं होता है, तो एक साल पूरा होने के बाद दोनों फिर से जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इससे पहले 4 जुलाई 2026 को कड़कड़डूमा कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। ट्रायल कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के आदेश का हवाला देते हुए कहा था कि फिलहाल दोनों को जमानत नहीं दी जा सकती।


दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश का मामला

यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा की साजिश से जुड़ा है। मामले में दिल्ली पुलिस ने UAPA समेत कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि उमर खालिद और शरजील इमाम की इस साजिश में अहम भूमिका थी। हालांकि, ये अभियोजन पक्ष के आरोप हैं और मामले में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को शर्तों के साथ जमानत दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम के मामले में उनकी कथित भूमिका और मामले की परिस्थितियों को अलग माना था।