मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बोइंग 787-9 विमान में 306 यात्री सवार थे। विमान के जयपुर में उतरने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू की। शुरुआती जानकारी में अलर्ट गलती से सक्रिय होने की आशंका जताई गई है, हालांकि घटना की वजह की आधिकारिक पुष्टि के बिना इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
हाइजैक अलर्ट के बाद जयपुर डायवर्ट हुई फ्लाइट
रिपोर्टों के अनुसार, विमान से ‘स्क्वॉक कोड 7500’ का संकेत मिला था। विमानन क्षेत्र में इस कोड का इस्तेमाल हाइजैक या विमान में गैरकानूनी हस्तक्षेप की स्थिति का संकेत देने के लिए किया जाता है। इस संकेत के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल और सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बरती तथा विमान को दिल्ली के बजाय जयपुर उतारने का फैसला किया।
हालांकि, केवल इस कोड के सक्रिय होने से यह साबित नहीं होता कि विमान को वास्तव में हाईजैक करने की कोशिश हुई थी। शुरुआती रिपोर्टों में संकेत गलती से सक्रिय होने की संभावना भी बताई गई है।
सुरक्षित लैंडिंग के बाद विमान की जांच
विमान के जयपुर एयरपोर्ट पर उतरने के बाद उसे निर्धारित आइसोलेशन क्षेत्र में ले जाया गया, ताकि सुरक्षा एजेंसियां विमान और यात्रियों के सामान की जांच कर सकें। रिपोर्टों के अनुसार, यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकालकर एयरपोर्ट के निर्धारित क्षेत्र में पहुंचाया गया।
इस तरह की स्थिति में विमान की जांच करना सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा होता है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कोई वास्तविक खतरा था या अलर्ट किसी अन्य वजह से सक्रिय हुआ।
क्या विमान में बम या हाइजैक की वास्तविक धमकी थी?
इस घटना को लेकर शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में बम की धमकी और हाइजैक अलर्ट, दोनों का उल्लेख किया गया है। कुछ रिपोर्टों में इसे संभावित गलत अलर्ट बताया गया, जबकि अन्य रिपोर्टों में घटना की जांच जारी होने की जानकारी दी गई।
इसलिए अभी यह कहना उचित नहीं होगा कि विमान में वास्तव में बम था या हाईजैक की कोशिश हुई थी। घटना की असली वजह स्पष्ट करने के लिए संबंधित अधिकारियों की जांच और आधिकारिक बयान महत्वपूर्ण हैं।
यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
फ्लाइट को जयपुर डायवर्ट करना और सुरक्षित लैंडिंग के बाद जांच करना संभावित खतरे को देखते हुए उठाए गए एहतियाती कदम थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, विमान में सवार सभी यात्री और चालक दल के सदस्य सुरक्षित थे।
घटना की वजह, अलर्ट सक्रिय होने की परिस्थितियों और जांच के अंतिम निष्कर्षों पर संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।



