GRAP के तहत प्रदूषण की स्थिति बिगड़ने पर अलग-अलग चरणों में अतिरिक्त उपाय लागू किए जाते हैं। इसका उद्देश्य हवा की गुणवत्ता को और खराब होने से रोकना है। वाहन चालकों के लिए यह जानना जरूरी है कि पहले चरण में किन नियमों का पालन करना होगा और प्रदूषण बढ़ने पर कौन-सी अतिरिक्त पाबंदियां लागू हो सकती हैं।
GRAP-1 में किन गाड़ियों पर रहेगी रोक?
GRAP-1 लागू होने का मतलब यह नहीं है कि दिल्ली में सभी पेट्रोल और डीजल गाड़ियों का चलना बंद हो गया है। पहले चरण में पुराने और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर पहले से लागू प्रावधानों को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया जाता है।
पुराने वाहन: निर्धारित आयु सीमा पूरी कर चुके पेट्रोल और डीजल वाहनों से संबंधित लागू नियमों का पालन करना होगा।
PUC प्रमाणपत्र: वाहन चालकों को वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र रखना चाहिए। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई हो सकती है।
प्रदूषण फैलाने वाले वाहन: अधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों की जांच और प्रवर्तन कार्रवाई तेज की जा सकती है।
BS मानक: BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल कारों पर अतिरिक्त प्रतिबंध GRAP के तीसरे चरण में लागू हो सकते हैं। पहले चरण में सभी ऐसी कारों पर अपने आप प्रतिबंध नहीं लगता।
वाहन की उम्र के आधार पर लागू नियम और GRAP के तहत लगने वाले अतिरिक्त प्रतिबंध अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी के ईंधन प्रकार, BS मानक और मौजूदा सरकारी आदेश की जांच करनी चाहिए।
GRAP के चारों चरणों में कैसे बढ़ेंगी पाबंदियां?
GRAP में प्रदूषण की गंभीरता के अनुसार चार चरण निर्धारित हैं। प्रत्येक अगले चरण में पहले से लागू उपायों के साथ अतिरिक्त कदम उठाए जाते हैं।
चरण 1: खराब हवा — AQI 201 से 300
यह चरण दिल्ली में फिलहाल लागू किया गया है। इसमें प्रदूषण नियंत्रण के लिए सड़कों की सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और खुले में कचरा जलाने पर रोक जैसे उपायों पर जोर दिया जाता है।
वाहनों के मामले में पुराने वाहनों से जुड़े नियमों, PUC प्रमाणपत्र और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। सामान्य निजी कारों पर इस चरण में व्यापक प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
चरण 2: बहुत खराब हवा — AQI 301 से 400
यदि प्रदूषण बढ़कर बहुत खराब श्रेणी में पहुंचता है, तो सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के उपाय तेज किए जाते हैं।
इस चरण में पार्किंग शुल्क बढ़ाने, मेट्रो और बस सेवाओं की आवृत्ति बढ़ाने तथा डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर निर्धारित प्रतिबंध लागू करने जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।
चरण 3: गंभीर हवा — AQI 401 से 450
इस चरण में वाहन संबंधी प्रतिबंध ज्यादा सख्त हो जाते हैं। संशोधित GRAP नियमों के अनुसार, दिल्ली और निर्धारित NCR जिलों में BS-III पेट्रोल तथा BS-IV डीजल या उससे नीचे के मानक वाले हल्के मोटर वाहनों (LMV) पर प्रतिबंध लागू हो सकता है।
गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और सोनीपत जैसे निर्धारित क्षेत्रों में भी संबंधित नियम लागू किए गए हैं। आवश्यक निर्माण गतिविधियों और कुछ मालवाहक वाहनों पर भी अतिरिक्त पाबंदियां लग सकती हैं।
चरण 4: बेहद गंभीर हवा — AQI 450 से अधिक
यह GRAP का सबसे सख्त चरण है। इस स्थिति में वाहनों के प्रवेश, मालवाहक वाहनों और निर्माण गतिविधियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लागू हो सकते हैं।
गैर-दिल्ली पंजीकरण वाले वाहनों के प्रवेश पर BS मानक और वाहन श्रेणी के आधार पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। ट्रकों और भारी मालवाहक वाहनों पर भी संशोधित नियमों के अनुसार कार्रवाई हो सकती है। स्कूलों और कार्यालयों के संचालन को लेकर भी संबंधित प्रशासन अतिरिक्त कदम उठा सकता है।
ध्यान दें कि तीसरे और चौथे चरण की पाबंदियां तभी लागू मानी जाएंगी, जब CAQM उन्हें आधिकारिक रूप से लागू करने का आदेश जारी करे।
वाहन चालकों को अभी क्या करना चाहिए?
दिल्ली-NCR में वाहन चलाने वालों को अपने वाहन का PUC प्रमाणपत्र वैध रखना चाहिए और नियमित रूप से उसकी सर्विसिंग करानी चाहिए। यदि आपके पास पुरानी पेट्रोल या डीजल गाड़ी है, तो उसकी पात्रता और लागू प्रतिबंधों की आधिकारिक जानकारी जरूर जांचें।
दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए आगे क्या होगा?
CAQM ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण की स्थिति और मौसम के पूर्वानुमान की लगातार समीक्षा की जाएगी। यदि AQI में और गिरावट आती है, तो संबंधित मानकों के अनुसार अगले चरण के उपाय लागू किए जा सकते हैं।
फिलहाल वाहन चालकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि GRAP-1 लागू होने से सभी कारों पर प्रतिबंध नहीं लगा है। आगे की पाबंदियां दिल्ली की वायु गुणवत्ता और आयोग के आधिकारिक आदेश पर निर्भर करेंगी।



