हालांकि, यह फैसला सामान्य पेट्रोल कारों और बाइकों को सीधे E100 पर चलाने की अनुमति नहीं देता। आइए 9 सवाल-जवाब में समझते हैं कि E100 क्या है और इस फैसले का वाहन चालकों पर क्या असर पड़ सकता है।
1. E100 ईंधन क्या होता है?
E100 ऐसा ईंधन है जिसमें लगभग पूरी तरह एथेनॉल का इस्तेमाल होता है। एथेनॉल एक अल्कोहल आधारित ईंधन है, जिसे गन्ने, मक्का और अन्य जैविक कच्चे माल से बनाया जा सकता है। इसकी सटीक संरचना और इस्तेमाल के मानक संबंधित ईंधन विनिर्देशों पर निर्भर करते हैं।
2. सरकार ने क्या मंजूरी दी है?
सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन कर E100 को वाहन उत्सर्जन मानकों, ईंधन विनिर्देशों और परीक्षण से जुड़े नियमों में शामिल किया है। इससे वाहन निर्माता कंपनियों के लिए E100 पर चलने वाले वाहनों के विकास और प्रमाणन का नियामकीय रास्ता स्पष्ट हुआ है।
3. क्या मौजूदा पेट्रोल कार या बाइक में E100 भर सकते हैं?
नहीं। सामान्य पेट्रोल वाहन या E20 के लिए तैयार वाहन को E100 पर चलाना सुरक्षित मानकर नहीं चलना चाहिए। E100 के लिए इंजन, फ्यूल पंप, इंजेक्टर, पाइप और सील जैसे हिस्सों को खास तौर पर तैयार करना पड़ सकता है। केवल निर्माता द्वारा इस ईंधन के लिए डिजाइन और प्रमाणित वाहन ही इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
4. E100 और E20 में क्या अंतर है?
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। वहीं E100 लगभग पूरी तरह एथेनॉल आधारित ईंधन है। दोनों में एथेनॉल की मात्रा और तकनीकी जरूरतें काफी अलग हैं। इसलिए E20 के अनुकूल वाहन को अपने-आप E100 के अनुकूल नहीं माना जा सकता।
5. क्या E100 से कच्चे तेल का आयात घटेगा?
सरकार की योजना के अनुसार, घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से पेट्रोल बनाने के लिए आयातित कच्चे तेल की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि ऐसे वाहनों की संख्या कितनी बढ़ती है, ईंधन कितना उपलब्ध होता है और उसका इस्तेमाल कितने बड़े स्तर पर किया जाता है।
6. क्या E100 से प्रदूषण कम होगा?
एथेनॉल जैसे जैव-आधारित ईंधन से कुछ प्रकार के टेलपाइप उत्सर्जन कम हो सकते हैं। लेकिन कुल पर्यावरणीय लाभ का आकलन करते समय एथेनॉल बनाने, उसके परिवहन और वाहन में जलने तक के पूरे जीवनचक्र को देखना जरूरी है। इसलिए इसे हर तरह के प्रदूषण को खत्म करने वाला ईंधन कहना सही नहीं होगा।
7. क्या E100 से गाड़ी का माइलेज बढ़ेगा?
जरूरी नहीं। एथेनॉल में प्रति लीटर पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा होती है। इसलिए समान दूरी तय करने के लिए अधिक ईंधन की जरूरत पड़ सकती है। वास्तविक माइलेज वाहन के इंजन, तकनीक, ट्यूनिंग, ड्राइविंग और ईंधन की कीमत पर निर्भर करेगा।
8. क्या E100 ईंधन पेट्रोल से सस्ता होगा?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी। ईंधन की कीमत उत्पादन लागत, कच्चे माल, टैक्स, भंडारण, परिवहन और बिक्री व्यवस्था पर निर्भर करेगी। यदि E100 वाहनों और ईंधन की उपलब्धता बढ़ती है, तो लागत और कीमत को लेकर तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।
9. आम वाहन चालकों के लिए इसका क्या मतलब है?
फिलहाल आम वाहन चालकों को अपनी मौजूदा कार या बाइक में किसी तरह का बदलाव करने या E100 इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। यह फैसला मुख्य रूप से ऐसे वाहनों के लिए नियामकीय ढांचा तैयार करता है, जिन्हें अधिक एथेनॉल वाले ईंधन पर चलने के लिए बनाया गया है। भविष्य में ऐसे वाहनों की उपलब्धता, कीमत और ईंधन नेटवर्क तय करेंगे कि इसका इस्तेमाल कितनी तेजी से बढ़ता है।
निष्कर्ष
E100 ईंधन को नियमों में शामिल करना भारत की वैकल्पिक ईंधन रणनीति में महत्वपूर्ण कदम है। इससे वाहन निर्माता कंपनियों को फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक विकसित करने में मदद मिल सकती है और लंबे समय में आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने का अवसर मिल सकता है। लेकिन आम पेट्रोल वाहन चालकों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि E100 केवल उन्हीं वाहनों में इस्तेमाल करें जिन्हें निर्माता ने इसके लिए डिजाइन और प्रमाणित किया हो।



