परीक्षण में सभी मानकों पर खरी उतरी मिसाइल
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, परीक्षण के दौरान इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR), चांदीपुर में तैनात विभिन्न उपकरणों ने मिसाइल के प्रदर्शन से जुड़े आंकड़े दर्ज किए। इन आंकड़ों के विश्लेषण से पुष्टि हुई कि मिसाइल ने सभी निर्धारित परीक्षण उद्देश्यों को पूरा किया।
यह परीक्षण यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल यानी सेना के उपयोग संबंधी मूल्यांकन परीक्षणों के तहत किया गया। इस दौरान DRDO के वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा बलों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के अधिकारी मौजूद रहे।
क्या है प्रलय मिसाइल की खासियत?
‘प्रलय’ भारत में विकसित ठोस ईंधन से चलने वाली सतह से सतह पर मार करने वाली क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी बताई गई मारक क्षमता लगभग 150 से 500 किलोमीटर तक है। यह अलग-अलग प्रकार के पारंपरिक वॉरहेड ले जाने में सक्षम है।
क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल की खासियत यह है कि यह पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में कम ऊंचाई वाले मार्ग पर उड़ान भर सकती है और जरूरत के अनुसार उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदलने जैसी क्षमता रखती है। इसमें आधुनिक गाइडेंस और नेविगेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे लक्ष्य तक सटीक पहुंचने में मदद मिलती है।
DRDO और भारतीय कंपनियों ने मिलकर किया विकसित
इस मिसाइल को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं के सहयोग से विकसित किया है। इसके निर्माण में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) की भी अहम भूमिका रही है, जो इसके विकास और उत्पादन से जुड़ी भागीदार कंपनी है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल परीक्षण पर DRDO, रक्षा बलों और उद्योग से जुड़े सभी साझेदारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों से लैस यह मिसाइल भारतीय सेना की तकनीकी क्षमता और बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच उसकी परिचालन तैयारी को और मजबूत करेगी।
जल्द सेना में शामिल हो सकती है प्रलय
रक्षा मंत्रालय ने सफल परीक्षण के बाद संकेत दिया है कि मिसाइल प्रणाली को सशस्त्र बलों में शामिल करने की प्रक्रिया अब करीब पहुंच गई है। हालांकि, इसे सेना में शामिल करने की अंतिम तारीख या विस्तृत कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है।
प्रलय का सफल परीक्षण भारत की स्वदेशी मिसाइल निर्माण क्षमता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे देश की रक्षा जरूरतों के लिए घरेलू तकनीक और उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।



