केंद्र सरकार ने आगे से दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने का रास्ता बंद कर दिया है । दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के विरोध में चले कॉकरोच जनता पार्टी और विपक्षी दलों के प्रदर्शन के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला सामने आया है । 
इसके तहत जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थलों की लिस्ट से हटा दिया है । इसे प्रदर्शन स्थल के रूप में मान्यता देने वाली अधिसूचना रद्द कर दी गई है । 

धरना-प्रदर्शन के लिए तीन नई जगह

गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिशों के आधार पर दिल्ली में धरना-प्रदर्शन के लिए जो तीन जगहें तय की गई है उनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल है । 
दिल्ली में नागरिक अधिकारों की मांग से जुड़े प्रदर्शनों के लिए उचित स्थान तय करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्रालय ने एक कमेटी बनाई थी जिसकी सिफारिश के बाद यह फैसला लिया गया है । इन तीनों स्थानों पर धरना-प्रदर्शन आयोजित करने को लेकर विस्तृत और संशोधित एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) अलग से जारी की जाएगी ।

 33 साल से प्रदर्शन स्थल रहा जंतर-मंतर 

दिल्ली का जंतर-मंतर पिछले 33 सालों से प्रदर्शन स्थल रहा और इस दौरान कई ऐतिहासिक आंदोलनों का गवाह रहा । यह स्थान राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों से लेकर आम नागरिकों के विरोध प्रदर्शन का अहम केंद्र रहा । कॉकरोच जनता पार्टी ने भी नीट और अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं में धांधली के आरोपों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर यहीं से आंदोलन की शुरुआत की थी । 

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दिल्लीवासियों के लिए राहत भरी खबर 

सरकार के इस फैसले से दिल्ली के लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है । इससे उन्हे न सिर्फ जाम से मुक्ति मिलेगी बल्कि अक्सर होने वाले विरोध प्रदर्शनों की वजह से सामान्य दिनचर्या में भी बाधित नहीं होगी । आम तौर पर जैसे ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शरू होते हैं सड़क यातायात बुरी तरह से प्रभावित होता है । मेट्रो स्टेशनों के बंद होने की वजह से भी लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा है । कारोबारियों पर भी बंद का सीधा असर पड़ता है । दरअसल जंतर-मंतर दिल्ली का हृदय कहे जाने वाले कनाटप्लेस के पास स्थित है । यहां से संसद भवन और सभी मंत्रालय काफी नजदीक है । केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण कार्यालय एक-दो किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं । इसलिए माना जाता है कि यहां होने वाले विरोध प्रदर्शनों की आवाज सरकार तक सीधे और जल्दी पहुंचती है । इसलिए प्रदर्शनकारियों का यह पंसदीदा जगह रहा है ।