एटा: उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक कथित फर्जी मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि इस पूरे मामले का खुलासा किसी की शिकायत से नहीं बल्कि कॉलेज के कथित प्रबंधक के फर्जी अपहरण की कहानी से हुआ।

पुलिस के मुताबिक, मारहरा क्षेत्र के महमूदपुर नगरिया गांव में बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी के नाम से यह संस्थान करीब चार साल से चल रहा था । आरोप है कि यहां अलग-अलग मेडिकल और पैरामेडिकल कोर्स में छात्रों को दाखिला दिया जाता था और बाद में उन्हें फर्जी आईडी कार्ड, सर्टिफिकेट, मार्कसीट और अन्य दस्तावेज दिए जाते थे । 

16 सितंबर को आया अपहरण का मामला

फर्जीवाड़े की इस कहानी में नया मोड़ तब आया जब 16 सितंबर को पुलिस को रामसेवक नाम के व्यक्ति ने सूचना दी कि उसके भाई और कथित कॉलेज प्रबंधक सतेन्द्र कुमार का कुछ युवकों ने अपहरण कर लिया है और दो लाख रुपये की फिरौती मांगी गई है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और मोबाइल लोकेशन के आधार पर सतेन्द्र कुमार को आगरा से खोज निकाला । जब पूछताछ शुरू हुई तो पुलिस को उसके बयान संदिग्ध लगे । पुलिस के मुताबिक जांच आगे बढ़ी तो अपहरण की कहानी ही झूठी निकली । आरोप है कि सतेन्द्र पर छात्रों से लिए गए पैसे लौटाने का काफी दबाव था जिससे बचने के लिए उसने अपने साथियों के साथ मिलकर खुद के ही अपहरण की साजिश रची ।


जांच के दौरान खुली पूरी कहानी 


जब पुलिस ने सतेन्द्र कुमार के कथित कॉलेज की पड़ताल शुरू की तो मामला और चौंकाने वाला निकला। पुलिस टीम महमूदपुर नगरिया में जिस जगह पहुंची, वहां करीब चार बीघा जमीन पर एक जर्जर एक मंजिला इमारत थी। इसी इमारत पर बीएस मेडिकल कॉलेज का बोर्ड लगा था। पुलिस के अनुसार, परिसर में फर्जी मार्कशीट, परीक्षा रिकॉर्ड, छात्र आईडी कार्ड, एडमिशन फॉर्म, अटेंडेंस रिकॉर्ड, फीस की रसीदें, परीक्षा की कॉपियां, प्रश्नपत्र, मुहर और दूसरे दस्तावेज मिले।

पुलिस की शुरुआती जांच में 54 छात्रों के दाखिले से जुड़े रिकॉर्ड मिलने की बात सामने आई है। ये छात्र एटा कासगंज, अलीगढ़, आगरा और हाथरस के बताए जाते हैं । पुलिस के मुताबिक, संस्थान में डी-फार्मा, बी-फार्मा, बीएससी नर्सिंग, डीएमएलटी, बीएमएलटी, बीएएमएस, जीएनएम और एएनएम जैसे कई कोर्सों में दाखिले का दावा किया जाता था।


दूसरे संस्थान के नाम से भी मिले दस्तावेज 

जांच के दौरान कुछ तैयार डिग्री और मार्कशीट मिलने की बात सामने आई है। इनमें दूसरे विश्वविद्यालय के नाम वाले दस्तावेज भी बताए गए हैं। पुलिस अब इन दस्तावेजों की वैधता और उनके तैयार होने की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है। इस संबंध में संबंधित विभागों को भी जानकारी भेजे जाने की बात कही गई है। 

चाय बेचने वाले को बताया गया चेयरमैन

इस मामले में एक और हैरान करने वाली बात सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी को भगवान दास के नाम पर रजिस्टर्ड दिखाया गया था। भगवान दास मारहरा क्षेत्र के धरपसी गांव के रहने वाले हैं और चाय बेचते हैं। उन्होंने खुद को इस पूरे मामले से अनजान बताया है, जबकि पुलिस का कहना है कि वह कॉलेज से जुड़े कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करता था।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि उनके नाम और पहचान का इस्तेमाल संस्थान के लिए किस तरह और क्यों किया गया। भगवान दास समेत इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पहले भी सामने आई थीं शिकायतें

रिपोर्टों के मुताबिक, इस संस्थान को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी थीं। मई 2025 में कुछ छात्र-छात्राओं ने फर्जी डिग्री दिए जाने की शिकायत की थी। इसके बाद प्रशासन ने मामले की जांच कराई थी। जांच में संस्थान के किसी विश्वविद्यालय से संबद्ध होने की पुष्टि नहीं हुई और उसे अवैध बताया गया था। इसके बावजूद संस्थान में दाखिले जारी रहने का आरोप है।
फीस लेने के बाद डिग्री और मार्कशीट नहीं देने को लेकर वर्ष 2025 में पुलिस में भी शिकायतें दर्ज हुई थीं। 

करोड़ों की ठगी का आरोप
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में छात्रों और अन्य लोगों से बड़ी रकम लिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कुल कितनी रकम ली गई । कुछ शिकायतकर्ताओं ने अलग-अलग रकम लिए जाने का आरोप लगाया है।
एक स्कूल संचालक ने भी 55 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है। वहीं पुलिस के सामने कई छात्र और छात्राएं भी पहुंचे हैं और अपने बयान दर्ज करा रहे हैं।

पुलिस ने इस मामले में अबतक सतेन्द्र कुमार, गौरव अग्रवाल, भगवान दास, नरेंद्र और मोहम्मद शरीफ कुरैशी को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि आगे की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों और छात्रों के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।