नई दिल्ली: दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के एक बयान ने राजनीतिक और फिल्मी जगत में नई बहस छेड़ दी है। शाह ने एक सोशल मीडिया वीडियो में खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की। इसके बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अभिनेता पर तीखा तंज कसा। अब इस विवाद में अभिनेता पुनीत इस्सर की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

किरेन रिजिजू ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नसीरुद्दीन शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि वह पहले अभिनेता का सम्मान करते थे और उन्हें पसंद भी करते थे। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि शाह इतने खतरनाक ‘अर्बन दिमागी नक्सल’ हैं।

रिजिजू ने आगे कहा कि उन्हें शाह के असली चरित्र के बारे में बहुत देर से पता चला। उन्होंने अभिनेता की सोच को भारत के लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक बताया।

नसीरुद्दीन शाह ने खुद को बताया ‘दिमागी नक्सल’

विवाद की शुरुआत नसीरुद्दीन शाह के उस वीडियो से हुई, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया था। वीडियो में अभिनेता ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि उन्हें एंटी-नेशनल और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसे नामों से भी पुकारा जाता है।

शाह ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए शिक्षा व्यवस्था, युवाओं और लोकतंत्र को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों से जुड़े मुद्दों का जिक्र भी किया।

अभिनेता ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि युवाओं की आवाज और उनके साथ हुए व्यवहार को याद रखा जाएगा।

पुनीत इस्सर ने भी की आलोचना

इस विवाद में अभिनेता पुनीत इस्सर ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नसीरुद्दीन शाह वरिष्ठ कलाकार हैं और वह उनका सम्मान करते हैं, लेकिन उनके मुताबिक शाह को मुद्दों पर चुनिंदा तरीके से प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए।

इस्सर ने कहा कि अगर शाह मौजूदा सरकार की नीतियों से असहमत हैं, तो उन्हें चुनाव लड़कर अपने विचारों को राजनीतिक रूप से सामने रखना चाहिए। उनके बयान ने इस विवाद को और चर्चा में ला दिया है।

जामिया में छात्र क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?

नसीरुद्दीन शाह के वीडियो में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। छात्र विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने और चुनाव की निश्चित समय-सीमा घोषित करने की मांग कर रहे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, जामिया में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से नहीं हुए हैं। इस मुद्दे पर छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच विवाद जारी है। इसी संदर्भ में शाह ने छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई और सरकार की नीतियों पर सवाल किए।

बयान से बढ़ी राजनीतिक बहस

नसीरुद्दीन शाह के बयान और किरेन रिजिजू की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला राजनीतिक विचारधारा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और छात्र आंदोलनों को लेकर बहस का विषय बन गया है। एक तरफ शाह ने सरकार की आलोचना करते हुए छात्रों का समर्थन किया, तो दूसरी तरफ रिजिजू और पुनीत इस्सर ने उनके विचारों पर सवाल उठाए।

फिलहाल इस विवाद में दोनों पक्षों के बयान चर्चा में हैं। यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और फिल्मी जगत से और क्या प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।