अमेरिका के मिशिगन से अब्दुल अल-सैयद की जीत के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए उत्तर प्रदेश की राजनीति को संदेश दिया है। उन्होंने लिखा कि मिशिगन में एक अब्दुल जीत गया है, अब उत्तर प्रदेश के अब्दुल को अपनी सियासी पहचान मजबूत करनी होगी।


ओवैसी ने अपने पोस्ट में कहा कि कुछ राजनीतिक दलों ने 'अब्दुल' शब्द को तंज और मजाक का विषय बनाने की कोशिश की है। उन्होंने लिखा, “वक्त आ गया है कि हम दिखाएं कि अब्दुल अल्लाह के सिवा किसी की गुलामी नहीं करता। अब दरी नहीं बिछाएंगे।”

मिशिगन से अब्दुल अल-सैयद की जीत का जिक्र

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में मिशिगन से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराया है। इस जीत के साथ वह अमेरिकी सीनेट के पहले मुस्लिम सदस्य बनने जा रहे हैं। उनकी जीत को लेकर भारतीय राजनीति में भी चर्चा शुरू हो गई है।

यूपी की मुस्लिम राजनीति से क्यों जोड़ रहे हैं ओवैसी?

ओवैसी लंबे समय से उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी और स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व की बात उठाते रहे हैं। उनके 'अब्दुल' और 'दरी बिछाने' वाले बयान का संदर्भ उन आरोपों से जुड़ा है, जिनमें कहा जाता है कि मुस्लिम मतदाता दूसरी पार्टियों के लिए चुनावी समर्थन देते हैं, लेकिन उन्हें सत्ता और नेतृत्व में पर्याप्त भागीदारी नहीं मिलती।

इस पोस्ट के जरिए ओवैसी ने मिशिगन में अब्दुल अल-सैयद की जीत को उत्तर प्रदेश के मुस्लिम युवाओं के लिए राजनीतिक पहचान और नेतृत्व के संदेश के रूप में पेश किया है।

2027 के यूपी चुनाव से पहले सियासी संदेश

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम वोट और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर दलों के बीच चर्चा तेज है। ओवैसी की यह पोस्ट भी इसी राजनीतिक बहस के बीच आई है। अब देखना होगा कि उनका यह संदेश प्रदेश की राजनीति में कितना असर डालता है और दूसरे दल इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।