नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मंगलवार को अदालत ने इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के जवाब पर अपना पक्ष रखने के लिए 10 दिन का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

राहुल गांधी समेत विपक्ष ने क्या सवाल उठाए?

विवाद का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) है। राहुल गांधी समेत विपक्ष के नेताओं ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज से जुड़ी याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि आयोग के कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए।

याचिकाकर्ताओं ने आयोग की निर्णय प्रक्रिया की जांच और संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा की मांग भी की है। हालांकि, ये आरोप हैं और इन पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।

चुनाव आयोग ने हलफनामे में क्या कहा?

निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग के अनुसार, विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 के तीनों आदेश आयोग के सर्वसम्मत फैसलों के आधार पर जारी किए गए थे। हालांकि, इस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि फाइलों पर चुनाव आयुक्तों की टिप्पणियां या सवाल अपने आप में आयोग का अंतिम निर्णय नहीं माने जा सकते। फॉर्म-6 के ऑनलाइन आवेदन में घोषणा प्रदर्शित करने के तरीके को लेकर भी आयोग ने स्पष्टीकरण दिया है।

अब 17 नवंबर को होगी सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं, ने याचिकाकर्ताओं को आयोग के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने का समय दिया है। अदालत अब दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर विचार करेगी।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने या उनके कामकाज पर रोक लगाने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। मामले में आगे क्या फैसला आता है, इस पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है।