गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कुणाल (21), सुमित (19), राधा (23) और बबीता (23) के रूप में हुई है। कुणाल और सुमित हरियाणा के सोनीपत जिले के निवासी बताए गए हैं, जबकि राधा और बबीता उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं। शुरुआती कार्रवाई के बाद मुंबई पुलिस की अपराध जांच शाखा ने भी आरोपियों की औपचारिक गिरफ्तारी और पूछताछ के लिए अदालत से अनुमति प्राप्त की।
18 अक्टूबर को टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई थी फायरिंग
यह घटना 18 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जुहू इलाके में हुई थी। पुलिस के अनुसार, हमलावरों ने अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाते हुए गोलीबारी की। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई और पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
इस घटना में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने हमलावरों की पहचान करने, उनके भागने के रास्ते का पता लगाने और घटना में इस्तेमाल किए गए हथियारों के स्रोत की जांच शुरू की।
हथियार पहुंचाने की कड़ी में चार लोगों की गिरफ्तारी
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए चार लोगों की भूमिका कथित हथियार सप्लाई नेटवर्क से जुड़ी हुई है। पुलिस का आरोप है कि कुणाल और सुमित ने हथियारों की व्यवस्था करने में मदद की, जबकि राधा और बबीता पर हथियार लेकर दिल्ली से मुंबई पहुंचने का आरोप है।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, दोनों महिलाओं ने कथित तौर पर ट्रेन से मुंबई पहुंचकर हथियारों से भरा बैग एक अन्य व्यक्ति तक पहुंचाया था। इसके बाद हथियार गोलीबारी करने वाले आरोपियों तक पहुंचे या नहीं, इसकी पूरी कड़ी की पुष्टि के लिए पुलिस पूछताछ कर रही है।
फिलहाल इन सभी आरोपों की जांच जारी है। अदालत में दोष सिद्ध होने तक गिरफ्तार आरोपियों को दोषी नहीं माना जा सकता।
दिल्ली और हरियाणा में हुई गिरफ्तारी
चारों आरोपियों को 20 अक्टूबर को अलग-अलग स्थानों से पकड़ा गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राधा और बबीता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया, जबकि कुणाल और सुमित को हरियाणा के सोनीपत से पकड़ा गया।
इसके बाद मामले में मुंबई पुलिस की अपराध जांच शाखा ने आरोपियों से पूछताछ के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई। जांच का उद्देश्य हथियारों की आपूर्ति, कथित साजिश और फायरिंग में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाना है।
कोटा से पहले ही पकड़े जा चुके हैं तीन संदिग्ध शूटर
इस मामले में चार नई गिरफ्तारियों से पहले मुंबई पुलिस ने राजस्थान के कोटा से तीन संदिग्ध शूटरों को पकड़ा था। उन्हें ट्रेन से हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई थी। जांचकर्ताओं को संदेह है कि घटना के बाद आरोपी मुंबई से बाहर निकलकर पुलिस से बचने की कोशिश कर रहे थे।
अब जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना है कि फायरिंग की योजना किसने बनाई, हथियार कहां से आए और घटना को अंजाम देने वालों को किस स्तर पर मदद मिली। पुलिस विभिन्न आरोपियों के बीच संपर्क और कथित आपराधिक नेटवर्क की भूमिका की भी जांच कर रही है।
लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से कथित संबंध की जांच
इस मामले में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से कथित संबंधों की भी जांच की जा रही है। कुछ रिपोर्टों में हथियार सप्लाई करने वाले नेटवर्क और विदेश में सक्रिय बताए जा रहे एक व्यक्ति की भूमिका पर संदेह जताया गया है।
हालांकि, किसी गिरोह की भूमिका, फायरिंग के पीछे का वास्तविक मकसद और आरोपियों के बीच संपर्क की प्रकृति को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकता है। इन पहलुओं पर आधिकारिक रूप से पुष्ट जानकारी और अदालत में पेश किए गए तथ्यों को ही निर्णायक माना जाना चाहिए।
पुलिस के सामने अब क्या हैं प्रमुख सवाल?
चार नई गिरफ्तारियों के बाद जांच में कई सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियारों की व्यवस्था कहां से की गई, उन्हें मुंबई तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किसे दी गई और फायरिंग की घटना के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था।
इसके अलावा, जांचकर्ताओं को यह भी पता लगाना है कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल थे और क्या आरोपियों के बीच किसी संगठित नेटवर्क के जरिए संपर्क किया गया था।



