क्या है ट्रंप का नया फैसला?
अमेरिका में सितंबर 2026 में लागू किए गए लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट के तहत रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ देशों के अमेरिकी बाजार में आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया था।
यह प्रावधान रूसी तेल और गैस के सबसे बड़े पांच आयातक देशों तथा रूस पर लगे प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले कुछ देशों को निशाना बना सकता था। हालांकि, 16 अक्टूबर के कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने संबंधित शुल्क और प्रतिबंधों के प्रावधानों पर छूट दे दी।
राष्ट्रपति ने आदेश में कहा कि फिलहाल यह छूट अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। आदेश के तहत संबंधित गतिविधियों पर निगरानी जारी रहेगी और परिस्थितियों के अनुसार भविष्य में दोबारा कार्रवाई की जा सकती है।
भारत को कितनी राहत मिली?
भारत रूस से कच्चे तेल का प्रमुख खरीदार रहा है। ऐसे में रूसी तेल की खरीद के कारण अमेरिका की ओर से संभावित अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का खतरा भारतीय निर्यातकों और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों के लिए चिंता का विषय था।
नए आदेश से संबंधित कानून के तहत 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ का तत्काल खतरा फिलहाल टल गया है। हालांकि, इसे भारत के लिए स्थायी छूट या अमेरिका की ओर से लगाए गए सभी दूसरे शुल्कों की समाप्ति नहीं माना जाना चाहिए।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर आगे का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन अपनी टैरिफ नीति में क्या बदलाव करता है और दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है।
रूस से डीजल की डील भी चर्चा में
ट्रंप प्रशासन का रूस से डीजल की आपूर्ति और बिक्री से जुड़ा हालिया कदम भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रूस से डीजल की बिक्री को लेकर हुई व्यवस्था के तहत अमेरिकी प्रतिबंधों में सीमित अवधि के लिए राहत दी गई है।
इस घटनाक्रम के बीच रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने के प्रावधानों में छूट का फैसला सामने आया है। इससे अमेरिकी ऊर्जा नीति और रूस के साथ उसके आर्थिक संबंधों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, रूस से डीजल से जुड़ी व्यवस्था और रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ की छूट अलग-अलग नीतिगत कदम हैं। इन्हें एक ही समझौते का हिस्सा बताने से पहले संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों की पुष्टि जरूरी है।
क्या भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा?
टैरिफ संबंधी इस फैसले से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तुरंत कम होने की गारंटी नहीं है। घरेलू ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, रिफाइनिंग लागत, परिवहन और करों समेत कई कारकों पर निर्भर करती हैं।



